पोखरण परमाणु परीक्षण : भारत ने दुनिया को चकमा देने के लिए रखे थे कोडवर्ड, डॉ कलाम को दिया था यह नाम

20 साल पहले 11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में हिली थी धरती और भारत बना था परमाणु शक्ति संपन्न देश.

नई दिल्ली : 11 मई 1998 को राजस्थान पोखरण में परमाणु परीक्षण कर भारत ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था. भारत ने इन परमाणु परीक्षण को करने में इतनी गोपनीयता बरती थी, कि दुनिया को इसकी कानोकान खबर तक नहीं लगी. तब की अटल बिहारी वाजपेयीसरकार के इस कदम से अमेरिका सहित पूरी दुनिया अचंभित हो गई थी. इस ऑपरेशन को पूरा किया था तब के  प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और डीआरडीओ के प्रमुख डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नेतृत्व में, जो बाद में देश के राष्ट्रपति बने.

11 और 13 मई, 1998 को राजस्थान के पोखरण परमाणु स्थल पर पांच परमाणु परीक्षण किये थे. यह दूसरा भारतीय परमाणु परीक्षण था. पहला परीक्षण मई 1974 में किया गया था. इसका कोड नाम स्माइलिंग बुद्धा (मुस्कुराते बुद्ध) था. 11 मई को हुए परमाणु परीक्षण में 15 किलोटन का विखंडन (फिशन) उपकरण और 0.2 किलोटन का सहायक उपकरण शामिल था. इन परमाणु परीक्षण के बाद कई देश भड़क गए. इसके बाद जापान और अमेरिका सहित प्रमुख देशों ने भारत के खिलाफ विभिन्न प्रतिबंध लगा दिए.

सिर्फ एक देश ने किया था हमारा समर्थन
इस परमाणु परीक्षण की सफलता पर भारतीय जनता ने भरपूर खुशी जताई थी. लेकिन दुनिया के दूसरे मुल्कों में इसकी तीखी प्रतिक्रिया हुई. खासकर अमेरिका जैसे देश इस पर बेहद भड़क गए थे. तब एकमात्र इजरायल ही ऐसा देश था, जिसने भारत के इस परीक्षण का समर्थन किया था.



भारत सरकार ने पांच परमाणु परीक्षण जो 11 मई 1998 को किये गए थे के उपलक्ष्य में आधिकारिक तौर पर भारत में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में 11 मई को घोषित किया. भारत सरकार ने पांच परमाणु परीक्षण जो 11 मई 1998 को किये गए थे के उपलक्ष्य में आधिकारिक तौर पर भारत में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के रूप में 11 मई को घोषित किया.

ऐसे रखा था पूरी दुनिया को भ्रम में...
पोखरण परमाणु विस्फोट से पहले दुनियाभर के जासूसों का ध्यान बांटने और उन्हें छकाने के लिए भरपूर मिसाइलें, रॉकेट और बम का इस्तेमाल किया गया था. उस दिन सभी को आर्मी की वर्दी में परीक्षण स्थल पर ले जाया गया था ताकि खुफिया एजेंसियों को लगे कि सेना के जवान ड्यूटी दे रहे हैं. 'मिसाइलमैन' अब्दुल कलाम भी सेना की वर्दी में वहां मौजूद थे. बताया जाता है डॉ. कलाम को कर्नल पृथ्वीराज का छद्म नाम दिया गया था. वह कभी ग्रुप में टेस्ट साइट पर नहीं जाते थे. वह अकेले जाते जिससे किसी को भी शक न हो.

बताया जाता है कि तड़के 3 बजे परमाणु बमों को सेना के ट्रकों के जरिए ट्रांसफर किया गया. इससे पहले इसे मुंबई से भारतीय वायु सेना के प्लेन से जैसलमेर बेस लाया गया था. इन परीक्षणों के ठीक 17 दिन बाद पाकिस्तान ने 28 व 30 मई को चगाई-1 व चगाई- 2 के नाम से अपने परमाणु परीक्षण किए.

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