ऐसा क्यों कहा जा रहा है कि चीन अमीर बनने से पहले बूढ़ा हो जाएगा?
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बीजिंग: मौजूदा दौर में चीन की सबसे बड़ी चिंता अपनी बुजुर्ग होती आबादी को लेकर है. ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया के सबसे ज्यादा आबादी वाले इस देश ने 1979 में एक बच्चे की नीति पेश की थी. लिहाजा जनसंख्या नियंत्रण की दशा में सख्त कदम उठाए गए. आनन-फानन में चीन ने जनसंख्या नीति बदलने का फैसला करते हुए दो बच्चे की नीति अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाए. उसी की अगली कड़ी में सरकार ने पिछले दिनों यह संकेत दिए हैं कि वह अपनी नीति वापस लेगी जिसमें कड़े जुर्माने और कई बार गर्भपात तथा नसबंदी कराने के लिए मजबूर करके प्रत्येक परिवार में बच्चों की संख्या पर सीमा तय की गई है. लेकिन इन सबके बावजूद चीन के समक्ष अप्रत्याशित बाधाएं सामने आ रही है क्योंकि कई माता-पिता की अब और बच्चे पैदा करने में रुचि नहीं है.
लोगों की बदलती सोच विशेषज्ञों ने कहा कि दंपति अब एक बच्चा पैदा करने में भी देरी कर रहे हैं क्योंकि वे अपना करियर बनाने जैसे अन्य लक्ष्यों में ज्यादा समय दे रहे हैं. चीन में बच्चे की परवरिश करने में आने वाला खर्च भी लोगों को और बच्चे पैदा करने से रोक रहा है. उत्तर पूर्वी शहर डालियन में एक मां ने कहा, ‘‘कई लोग दूसरा बच्चा चाहते हैं लेकिन सबसे बड़ी समस्या वित्तीय बोझ है. वह दूसरा और यहां तक कि तीसरा बच्चा चाहती हैं लेकिन खर्च से हिचक रही हैं.’’ विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक, 60 से अधिक की उम्र की आबादी का अनुपात 2015 में 15 फीसदी से बढ़कर 36.5 फीसदी तक पहुंच जाएगा.(फाइल फोटो) चीन के आबादी एवं विकास शोध केंद्र के लियू होंग्यान ने कहा, ‘‘परिवार नियोजन नीति को रद्द करने का मतलब होगा कि दंपतियों और परिवारों के पास यह अधिकार होगा कि कितने बच्चे चाहिए.’’ आधिकारिक शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने बताया कि देश की जनसांख्यिकीय स्थिति में बदलावों के कारण मसौदा कानून से परिवार के आकार पर नियमन को बाहर रखा गया है.
इन सब प्रयासों के बावजूद अर्थशास्त्रियों को आशंका है कि चीन अमीर बनने से पहले बूढ़ा हो जाएगा. विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक, 60 से अधिक की उम्र की आबादी का अनुपात 2015 में 15 फीसदी से बढ़कर 36.5 फीसदी तक पहुंच जाएगा. दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन दुनिया की सर्वाधिक आबादी वाला देश है जहां 1.3 अरब से अधिक जनसंख्या है. संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक 2050 तक चीन में 60 साल से अधिक उम्र के लोगों की संख्या करीब 44 करोड़ होगी.
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