13 फरवरी, 2012 को कार में चुंबक के सहारे बम लगाकर किए गए हमले में ताल येहोशुआ कोरेन घायल हो गई थीं और उन्हें सर्जरी करानी पड़ी थी. इसके अलावा उनका चालक तथा पास खड़े दो और लोग भी घायल हो गए थे.
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि हमले के पीछे ईरान का हाथ था और इसी तकनीक का उपयोग कर जॉर्जिया में भी हमले की कोशिश की गई. अभी तक नई दिल्ली का मामला सुलझा नहीं है और भारत ने हमले का संबंध ईरान से नहीं बताया है.
उस समय की खबरों के अनुसार, ईरान ने वह हमला तेहरान में उसके परमाणु वैज्ञानिक मुस्तफा अहमदी रोशन की हत्या के जवाब में किया था. परमाणु वैज्ञानिक की हत्या कथित रूप से इजरायल ने की थी.
भारत के एक पत्रकार सैयद मोहम्मद अहमद काजमी को उसी साल छह मार्च को गिरफ्तार किया गया था और उस पर हमले की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था. उसे गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत रखा गया. उसे उसी साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने विदेश नहीं जाने की शर्त पर जमानत दे दी थी.
तत्कालीन समाचारों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया कि उसने हमला करने वाले ईरानियों की देखभाल की थी. पुलिस के बयान के अनुसार, हमले में शामिल पांच लोग इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड्स के सदस्य थे जो दिल्ली आए थे.
ईरानी मेजर जनरल सुलेमानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड्स कॉर्प्स की विशिष्ट इकाई कुद्स फोर्स के कमांडर थे. लेकिन भारत में हुए हमले के दौरान इसका नाम नहीं आया था.
गुरुवार को इराक मे सुलेमानी की मौत के बाद शुक्रवार को ट्रंप ने कहा, "सुलेमानी अमेरिकी अधिकारियों और सैनिकों पर हमले की योजना बना रहे थे, लेकिन हमने उन्हें पकड़ लिया और उनकी हत्या कर दी."
उन्होंने सुलेमानी के निर्देशन में कथित रूप से कराए गए और कुद्स फोर्स तथा सहयोगी सेना द्वारा कराए गए हमलों को सूचीबद्ध किया.
ट्रंप ने कहा, "इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गॉर्ड कॉर्प्स और उसकी क्रूर कुद्स फोर्स ने सालों तक सुलेमानी के नेतृत्व में सैकड़ों अमेरिकी नागरिकों और कर्मियों को निशाना बनाया, उन्हें घायल किया और उनकी हत्या की है."

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